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Fixed vs Floating : कौन सी ब्याज दर चुनें?

July 4, 2026
6 min read

होम लोन लेते समय सबसे पहला बड़ा फैसला यही होता है, ब्याज दर fixed रखें या floating। दोनों का सीधा असर आपकी EMI और कुल चुकाई जाने वाली रकम पर पड़ता है। यहां आसान भाषा में समझते हैं कि दोनों में क्या फर्क है, और 2026 के हालात में आपके लिए क्या सही रहेगा।

Fixed रेट क्या है

Fixed यानी तय ब्याज दर। इसमें पूरी लोन अवधि (या शुरुआती कुछ सालों) के लिए ब्याज दर एक जैसी रहती है, चाहे बाजार में दरें घटें या बढ़ें। इसका सबसे बड़ा फायदा है, आपकी EMI हर महीने एक जैसी रहती है, जिससे घर का बजट बनाना आसान होता है।

नुकसान यह है कि fixed दर आमतौर पर floating से ज्यादा होती है। जुलाई 2026 में ज्यादातर बैंक fixed दर 9% से ऊपर से शुरू करते हैं, जबकि floating इससे काफी कम है। साथ ही, अगर आगे बाजार में दरें घटती हैं, तो आपको उसका फायदा नहीं मिलता।

Floating रेट क्या है

Floating यानी बदलती ब्याज दर। यह एक बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी होती है, जो ज्यादातर बैंकों में RBI की रेपो रेट होती है। इसे EBLR (External Benchmark Lending Rate) कहते हैं। आपकी दर का हिसाब आमतौर पर इस तरह होता है:

आपकी ब्याज दर = रेपो रेट + बैंक का स्प्रेड

(स्प्रेड आपकी CIBIL स्कोर और profile पर निर्भर करता है)

जब RBI रेपो रेट घटाता है, तो कुछ महीनों में आपकी EMI भी घट जाती है। जब दर बढ़ती है, तो EMI बढ़ जाती है। EBLR से जुड़े लोन में यह बदलाव तेजी से आता है, आमतौर पर तीन महीने के अंदर।

दोनों में मुख्य फर्क

बात Fixed Floating
ब्याज दर तय, बदलती नहीं बाजार के साथ बदलती है
EMI हमेशा एक जैसी घट-बढ़ सकती है
शुरुआती दर ज्यादा (9%+) कम (लगभग 7%)
दर घटने पर फायदा नहीं मिलता अपने आप मिलता है
किसके लिए अच्छा तय EMI चाहने वालों के लिए ज्यादातर borrowers के लिए

2026 में क्या बेहतर है

2025 में RBI ने रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट (1.25%) की कटौती की, जिससे यह 6.50% से घटकर 5.25% पर आ गई। जुलाई 2026 तक यह 5.25% पर स्थिर है। इसका मतलब है कि इस समय floating दरें काफी नीचे हैं, लगभग 7% से 7.5% के बीच, जबकि fixed दरें 9% से ऊपर।

इतने बड़े फर्क की वजह से, 2026 में ज्यादातर जानकार नए borrowers को floating (EBLR से जुड़ी) दर चुनने की सलाह देते हैं। इसके दो कारण हैं, अभी दरें नीचे हैं, और अगर RBI आगे और कटौती करता है तो उसका फायदा अपने आप मिल जाएगा। Fixed दर तभी समझदारी है जब आपको लगता है कि आने वाले सालों में दरें काफी बढ़ेंगी।

दरें बदलती रहती हैं। ऊपर दी गई दरें जुलाई 2026 के अनुमान हैं, आवेदन से पहले अपने बैंक से आज की सही दर जरूर पूछें।

किसे क्या चुनना चाहिए

F Floating चुनें, अगर

• आपकी आय स्थिर है (नौकरी या पक्की कमाई)

• CIBIL स्कोर 700 से ऊपर है

• आप आगे दर घटने का फायदा लेना चाहते हैं

• EMI में थोड़ी घट-बढ़ झेल सकते हैं

X Fixed चुनें, अगर

• आय ऊपर-नीचे होती है (मौसमी या freelance)

• अचानक EMI बढ़ने से बजट बिगड़ जाएगा

• आपको तय, एक जैसी EMI का मन का चैन चाहिए

• आपको लगता है आगे दरें काफी बढ़ेंगी

नए नियम (2026)

एक बड़ा बदलाव floating लोन वालों के हक में हुआ है। 1 जनवरी 2026 से RBI के नए नियम के तहत, individuals को दिए गए non-business floating-rate होम लोन पर prepayment या foreclosure charges नहीं लगते

यानी अब आप जब चाहें, जितना चाहें, अपना बकाया लोन जल्दी चुका सकते हैं और उस पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा। यह floating दर को और भी फायदेमंद बनाता है, क्योंकि अगर आपके पास एकमुश्त पैसा आता है, तो आप बिना penalty के लोन कम कर सकते हैं। ध्यान रहे, यह छूट fixed-rate लोन पर लागू नहीं होती।

सवाल-जवाब

क्या floating से fixed में (या उल्टा) बाद में बदल सकते हैं?
हां, ज्यादातर बैंक conversion की सुविधा देते हैं, जिसके लिए एक छोटी fee (जैसे कुछ हजार रुपये और GST) लगती है। अगर आपकी बाकी अवधि लंबी है और दरों में बड़ा फर्क है, तो conversion फायदेमंद हो सकता है।
रेपो रेट घटने पर मेरी EMI तुरंत क्यों नहीं घटती?
बैंकों को दर reset करने में आमतौर पर कुछ हफ्ते से तीन महीने तक लगते हैं। EBLR से जुड़े लोन में यह जल्दी होता है, जबकि पुराने MCLR वाले लोन में एक साल तक भी लग सकता है।
मेरा लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा है, कैसे पता करूं?
अपने लोन statement या sanction letter में देखें, या सीधे बैंक से पूछें। 2019 के बाद लिए गए ज्यादातर नए floating होम लोन EBLR (रेपो रेट) से जुड़े होते हैं। अगर आप अभी भी पुराने MCLR पर हैं, तो balance transfer से बचत हो सकती है।
floating में EMI बढ़ने पर बैंक क्या करता है?
दर बढ़ने पर बैंक या तो आपकी EMI बढ़ा देता है, या EMI वही रखकर लोन की अवधि बढ़ा देता है। अवधि बढ़ने से कुल ब्याज ज्यादा हो जाता है, इसलिए अगर संभव हो तो EMI बढ़वाना बेहतर रहता है।

यह जानकारी सिर्फ सामान्य मार्गदर्शन के लिए है, वित्तीय सलाह नहीं। ब्याज दरें बैंक और समय के हिसाब से बदलती हैं। सही दर और अपने लिए बेहतर विकल्प के लिए अपने बैंक या किसी योग्य सलाहकार से बात करें।

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