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PMAY और IAY में क्या फर्क है, पूरी जानकारी

July 1, 2026
5 min read

IAY क्या थी, कब शुरू हुई

इंदिरा आवास योजना (IAY) 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में शुरू हुई थी, शुरुआत में यह Rural Landless Employment Guarantee Programme (RLEGP) के तहत एक हिस्सा थी। 1996 में इसे एक स्वतंत्र योजना बना दिया गया। इसका मकसद ग्रामीण इलाकों में BPL (Below Poverty Line) परिवारों को पक्का घर बनाने के लिए आर्थिक मदद देना था, खासतौर पर SC/ST परिवारों और अन्य गरीब वर्गों को प्राथमिकता दी जाती थी।

इसे PMAY-G में क्यों बदला गया

2014 में Comptroller and Auditor General (CAG) की परफॉर्मेंस ऑडिट में IAY को लेकर कई गंभीर खामियां सामने आईं, जिनमें असली हाउसिंग शॉर्टेज का सही आकलन न होना, लाभार्थी चुनने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, घर की गुणवत्ता कमजोर होना, तकनीकी निगरानी की कमी, दूसरी योजनाओं से convergence न होना, और मॉनिटरिंग तंत्र कमजोर होना शामिल था। इन्हीं खामियों को दूर करने और "Housing for All" के लक्ष्य को पूरा करने के लिए 1 अप्रैल 2016 से IAY को पुनर्गठित कर Pradhan Mantri Awaas Yojana - Gramin (PMAY-G) बना दिया गया।

दोनों में मुख्य फर्क

सहायता राशि

IAY (पुराना)

₹70,000 (मैदानी) / ₹75,000 (पहाड़ी)

PMAY-G (नया)

₹1.20 लाख (मैदानी) / ₹1.30 लाख (पहाड़ी)

लाभार्थी चयन

IAY (पुराना)

BPL सर्वे लिस्ट के आधार पर, जिसे बाद में अविश्वसनीय और गैर-पारदर्शी माना गया

PMAY-G (नया)

SECC 2011 housing deprivation डेटा + Awaas+ सर्वे, Gram Sabha से वेरिफाइड

घर का न्यूनतम साइज़

IAY (पुराना)

20 वर्ग मीटर

PMAY-G (नया)

25 वर्ग मीटर, साथ में अलग रसोई की जगह

केंद्र-राज्य फंडिंग अनुपात

IAY (पुराना)

75:25 (सामान्य राज्य), 90:10 (नॉर्थ ईस्ट/UT)

PMAY-G (नया)

60:40 (मैदानी), 90:10 (नॉर्थ ईस्ट व पहाड़ी राज्य), UT में 100% केंद्र

निगरानी और भुगतान

IAY (पुराना)

कागज़ी रिकॉर्ड पर निर्भर, कमजोर रियल-टाइम ट्रैकिंग

PMAY-G (नया)

AwaasSoft और AwaasApp से geo-tagged फोटो, DBT से सीधा बैंक खाते में भुगतान

दूसरी योजनाओं से जुड़ाव (Convergence)

IAY (पुराना)

सीमित, ज्यादातर अलग-थलग तरीके से लागू

PMAY-G (नया)

MGNREGA मजदूरी, SBM-G शौचालय राशि, Saubhagya बिजली, Ujjwala LPG के साथ सीधा जुड़ाव

क्या नहीं बदला

कुछ बुनियादी सिद्धांत दोनों योजनाओं में एक जैसे रहे। घर का निर्माण खुद लाभार्थी को करना होता है, कॉन्ट्रैक्टर के जरिए बनवाना दोनों में मना है। इच्छुक लाभार्थी को घर के लिए ₹70,000 तक का लोन दिलवाने की सुविधा भी दोनों योजनाओं में मौजूद रही। और सबसे जरूरी, ग्रामीण गरीब परिवारों को पक्का घर देने का मूल मकसद वही है, सिर्फ प्रक्रिया और तकनीक को बेहतर बनाया गया।

अभी IAY खोज रहे हैं तो क्या करें

IAY अब एक अलग स्कीम के तौर पर मौजूद नहीं है, यह पूरी तरह PMAY-G में समा चुकी है। अगर आप "IAY लिस्ट", "IAY बेनिफिशियरी" या "IAY रजिस्ट्रेशन" जैसी चीज़ें खोज रहे हैं, तो असल में आपको PMAY-G से जुड़ी जानकारी चाहिए। पोर्टल पर भी "IAY/PMAYG Beneficiary" एक ही ऑप्शन के तहत मिलता है, दोनों नामों को साथ रखा गया है ताकि पुराने लाभार्थी भी अपनी पुरानी एंट्री ढूंढ सकें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या IAY के पुराने लाभार्थियों को दोबारा आवेदन करना होगा?
नहीं, IAY के तहत जिन्हें पहले से घर सैंक्शन हो चुका था, उनकी जानकारी PMAY-G सिस्टम में पहले से मौजूद है। नया आवेदन सिर्फ उन्हीं के लिए है जो अब तक किसी भी सूची में शामिल नहीं हुए।
क्या IAY का नाम अब भी पोर्टल पर दिखता है?
हां, AwaasSoft पोर्टल पर "IAY/PMAYG Beneficiary" के नाम से ही सर्च ऑप्शन मिलता है, क्योंकि पुराना डेटा भी इसी सिस्टम के अंतर्गत रखा गया है।
IAY और PMAY-G की सहायता राशि में इतना फर्क क्यों है?
यह अंतर महंगाई और निर्माण लागत बढ़ने के हिसाब से किया गया समायोजन है। साथ ही PMAY-G में घर का साइज़ भी बढ़ाया गया, जिससे सहायता राशि भी उसी अनुपात में बढ़ानी पड़ी।
क्या दोनों योजनाएं एक ही मंत्रालय के अंतर्गत आती हैं?
हां, दोनों Ministry of Rural Development के अंतर्गत ही रही हैं। सिर्फ योजना का नाम, प्रक्रिया और तकनीक बदली है, प्रशासनिक जिम्मेदारी वही मंत्रालय संभालता है।

अपना PMAY-G स्टेटस चेक करें

पुराना IAY रिकॉर्ड हो या नया आवेदन, दोनों की जानकारी अब एक ही जगह मिलती है।